Tourists रहें सावधान! लद्दाख में बड़ा एक्शन, नियम तोड़ने वालों पर लगा भारी जुर्माना

Sunday, Jun 28, 2026-07:19 PM (IST)

लेह ( मीर आफताब ) :   पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में ऑफ-रोडिंग के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के तहत, लद्दाख प्रशासन ने चार पर्यटकों पर कुल ₹2 लाख का जुर्माना लगाया है। इन पर्यटकों ने पैंगोंग झील और अन्य संरक्षित वन्यजीव इलाकों में अपनी गाड़ियां गैर-कानूनी तरीके से चलाई थीं।

यह कार्रवाई वन्यजीव विभाग ने उप-राज्यपाल वी.के. सक्सेना के निर्देशों पर की। उन्होंने पर्यटकों से जिम्मेदारी से व्यवहार करने और लद्दाख के नाजुक पर्यावरण का सम्मान करने की अपील की है।

अधिकारियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, पंजाब और उत्तर प्रदेश के चार वाहन मालिकों पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत ₹50,000-₹50,000 का जुर्माना लगाया गया। ये लोग पैंगोंग झील, चांगथांग और नुब्रा वन्यजीव अभयारण्यों सहित संरक्षित इलाकों में गाड़ी चलाते हुए दोषी पाए गए थे। उनकी गाड़ियां जब्त कर ली गईं और जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया।

प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई नियमित गश्त और सोशल मीडिया पर निगरानी के दौरान नियमों के उल्लंघन का पता चलने के बाद की गई। ये घटनाएं पैंगोंग झील के किनारे मेराक और लुकुंग, हानले में नुरबू ला और नुब्रा घाटी में सुमुर से सामने आईं।

हाल के मामलों में से एक में, 23 जून को मेराक के पास पैंगोंग झील के पानी में स्टंट करने के लिए एक महिंद्रा थार चलाई जा रही थी, जिससे वहां के नाजुक प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचा और झील प्रदूषित हुई। एक अन्य मामले में, चांगथांग कोल्ड डेजर्ट वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के अंदर लुकुंग के पास एक हुंडई क्रेटा को ऑफ़-रोडिंग करते हुए पकड़ा गया।

अधिकारियों ने एक महिंद्रा थार के खिलाफ भी कार्रवाई की, जिसे काराकोरम (नुब्रा-शायोक) वन्यजीव अभयारण्य के अंदर एक धारा (स्ट्रीम) से गुजरते हुए फिल्माया गया था। साथ ही, एक टोयोटा फॉर्च्यूनर पर भी कार्रवाई हुई, जिसे कथित तौर पर चांगथांग कोल्ड डेजर्ट वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के अंदर तिब्बती गज़ेल का पीछा करते हुए नुरबू ला के पास ऑफ-रोड चलाया गया था।

उप-राज्यपाल वी.के. सक्सेना ने कहा कि लद्दाख देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का स्वागत करता है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यटकों, एडवेंचर के शौकीनों और वाहन मालिकों को संरक्षित वन्यजीव आवासों में जाने या क्षेत्र के नाज़ुक इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि संरक्षित इलाकों के अंदर या उनके आस-पास ऑफ-रोड ड्राइविंग करना वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत सजा-योग्य अपराध है। उन्होंने कहा कि लद्दाख की जैव-विविधता और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों को बचाने के लिए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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Content Editor

Neetu Bala

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