Kashmir में गूंजे गणपति बप्पा के जयकारे! सदियों पुराने मंदिर में दिखी आस्था की खास तस्वीर
Monday, Sep 14, 2026-01:42 PM (IST)
श्रीनगर ( मीर आफताब ) : कश्मीर घाटी में गणेश चतुर्थी का पर्व आज श्रद्धा, आस्था और भाईचारे के रंग में रंगा नजर आया। गणेश चतुर्थी, जिसे पारंपरिक रूप से 'विनायक चोराम' के नाम से भी जाना जाता है, श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके में स्थित ऐतिहासिक गणपत्यार मंदिर में कश्मीरी पंडित समुदाय द्वारा बहुत श्रद्धा और आपसी भाईचारे के साथ मनाई जाती है। उत्सव की शुरुआत मंदिर के अंदर एक भव्य हवन और विशेष पूजा-अर्चना के साथ होती है। भक्त देवी 'बीब गरब माएज' को समर्पित खास स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन करते हैं और पारंपरिक 'रोथ' प्रसाद चढ़ाते हैं। त्योहार के दौरान स्थानीय पर्यावरण को बचाने के लिए समुदाय भगवान गणेश की इको-फ्रेंडली (पर्यावरण के अनुकूल) मिट्टी की मूर्तियों का इस्तेमाल करता है।
हब्बा कदल में स्थित गणपत्यार मंदिर झेलम नदी (जिसे ऐतिहासिक रूप से वितस्ता कहा जाता है) के किनारे बना है और सदियों पुराना है; इसका ज़िक्र प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। यह त्योहार कश्मीर घाटी में समुदाय के लिए एक मज़बूत सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है, जो परिवारों और स्थानीय प्रशासन को शांति और भाईचारे की भावना के साथ एक साथ लाता है।

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