आरक्षण रिपोर्ट को लेकर PDP का हल्लाबोल, Iltija Mufti ने सरकार से मांगा जवाब
Saturday, Sep 19, 2026-03:47 PM (IST)
श्रीनगर ( मीर आफताब ) : जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी और PDP की सीनियर नेता इल्तिजा मुफ़्ती ने पार्टी नेताओं और विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर छात्रों और नौकरी के उम्मीदवारों के भविष्य पर असर डालता है। उन्होंने मांग की कि सिफारिशों को गोपनीय रखने के बजाय सार्वजनिक किया जाए।
इल्तिजा मुफ़्ती ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियां "बेची" जा रही हैं और उन्होंने भर्ती और रोज़गार के मौकों को लेकर सरकार के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए।
सरकारी भर्ती और प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले के लिए कोटा के ढांचे पर चल रही बहस के बीच आरक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठी है। ओपन-मेरिट उम्मीदवारों के विरोध और उनके द्वारा अपनी बात रखे जाने के बाद, इस मामले की जांच के लिए दिसंबर 2024 में उमर अब्दुल्ला सरकार ने एक कैबिनेट सब-कमेटी बनाई थी।
इस कमेटी की अध्यक्षता स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने की थी और इसमें मंत्री जावेद अहमद राणा और सतीश शर्मा भी शामिल थे। बाद में कमेटी ने अपनी सिफारिशें मंत्रिपरिषद को सौंपीं। सरकार का कहना है कि सिफारिशों को तय मंज़ूरी प्रक्रिया से गुज़ारा गया है, जबकि रिपोर्ट की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
आरक्षण पर बहस मुख्य रूप से ओपन-मेरिट उम्मीदवारों के हिस्से और मौजूदा EWS कोटे पर केंद्रित रही है। कमेटी की सिफारिशों पर आई रिपोर्टों से पता चलता है कि EWS आरक्षण को 10 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत और RBA आरक्षण को 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, और कुल मिलाकर 10 प्रतिशत हिस्सा ओपन-मेरिट कोटे में जोड़ने का प्रस्ताव है। हालांकि, सटीक सिफारिशों को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह मुद्दा राजनीतिक रूप से विवादित रहा है, जिसमें ओपन-मेरिट समूह लगातार कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और आरक्षण ढांचे की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। इल्तिजा मुफ़्ती ने सवाल उठाया कि रिपोर्ट क्यों जारी नहीं की गई है, साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रोज़गार और भर्ती को लेकर भी चिंता जताई। PDP का यह विरोध सरकार के उस रुख के बीच हो रहा है जिसमें कहा गया है कि आरक्षण का प्रस्ताव कैबिनेट की प्रक्रिया से गुज़र चुका है और इस पर केंद्रीय स्तर पर और विचार-विमर्श की ज़रूरत है।
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