NC की दो दिवसीय बैठक के बाद CM उमर अब्दुल्ला के तीखे तेवर, उठाए बड़े सवाल, देखें Video

Friday, Nov 28, 2025-09:50 PM (IST)

श्रीनगर (मीर आफताब): जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट डॉ. फारूक अब्दुल्ला और वाइस प्रेसिडेंट एवं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में वर्किंग कमेटी की बैठक पार्टी हेडक्वार्टर नवा-ए-सुबहा, श्रीनगर में लगातार दूसरे दिन जारी रही। बैठक समाप्त होने के बाद सीएम उमर अब्दुल्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कई अहम बातें कहीं।

MP आगा रूहुल्लाह के साथ चल रही अनबन के बीच जिन्हें वर्किंग कमेटी की बैठक में नहीं बुलाया गया था मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि यह पैनल केवल उन नेताओं के लिए है जो पार्टी अनुशासन (डिसिप्लिन) का सख्ती से पालन करते हैं।

दो दिन की वर्किंग कमेटी बैठक समाप्त होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पार्टी की वर्किंग कमेटी उन्हीं लोगों के लिए है जो संगठनात्मक अनुशासन को समझते हैं और मीडिया के ज़रिए पार्टी से संवाद करने की कोशिश नहीं करते।

उन्होंने बताया कि पैनल ने मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की, विधायकों (MLA) और पदाधिकारियों से फीडबैक लिया, और बडगाम व नगरोटा सहित कई चुनाव क्षेत्रों में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा की। उमर ने कहा कि वर्किंग कमेटी ने मूल्यवान सुझाव दिए हैं और भरोसा दिलाया कि संगठनात्मक नेताओं और विधायकों से मिले सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमेटी ने चुनाव नतीजों की भी समीक्षा की है और पार्टी आने वाले दिनों में आवश्यक निर्णय लेगी।

उमर ने यह भी कहा कि कई महत्वपूर्ण संस्थान और विभाग, जो चुनी हुई सरकार के नियंत्रण में होने चाहिए, अभी भी उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। उन्होंने बाबा गुलाम शाह बादशाह यूनिवर्सिटी, इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कल्चरल एकेडमी, पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और डायरेक्टरेट ऑफ इन्फॉर्मेशन जैसे विभागों का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं में कई पद अभी भी ऐसे अरेंजमेंट्स के तहत चल रहे हैं जो चुनी हुई सरकार को बायपास करते हैं। उमर ने सवाल उठाया कि डायरेक्टर ऑफ इन्फॉर्मेशन, जो JKAS अधिकारी के लिए एक कैडर पोस्ट है, उस पर बार-बार IAS अधिकारी को क्यों नियुक्त किया जाता है?

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार के वादों में से दो चरण डिलिमिटेशन और चुनाव पूरा हो चुके हैं, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने के तीसरे चरण में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा केवल जम्मू-कश्मीर के लोगों से ही नहीं, बल्कि पूरे देश से किया गया था और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी यह आश्वासन दिया गया था।

उमर ने पूछा कि तीसरे चरण में देरी क्यों की जा रही है? संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों की बहाली के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ऐसे फैसलों के लिए दबाव बनाती रहेगी जो लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करें और चुने हुए प्रतिनिधियों को उनके अधिकार वापस दिलाएं।

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Content Editor

VANSH Sharma

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