J&K : फर्जी नौकरी और सब्सिडी घोटाले का पर्दाफाश, वकील समेत 2 आरोपी गिरफ्तार
Monday, Oct 05, 2026-10:32 PM (IST)
बडगाम (मीर आफताब): बडगाम पुलिस ने 2019 से कथित तौर पर सक्रिय एक बड़े फर्जी नौकरी और सरकारी सब्सिडी घोटाले का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए अब तक 2 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी किए जाने का अनुमान है। मामले में एक वकील समेत 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बडगाम के SSP के.के. हरिप्रसाद ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि यह नेटवर्क करीब 7 वर्षों से सक्रिय था। आरोपी लोगों को सरकारी नौकरी, SPO नियुक्ति, सरकारी सब्सिडी, विदेशी यूनिवर्सिटी में दाखिला और अन्य आकर्षक अवसर दिलाने का झांसा देकर कथित तौर पर पैसे लेते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बीरवाह के जाबगुला निवासी फिरदौस नबी और बीरवाह के रथसुना निवासी एडवोकेट जहांगीर अहमद डार के रूप में हुई है।
SSP ने बताया कि मामला 17 अगस्त 2026 को थाना बीरवाह में मिली शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि फिरदौस नबी ने SPO की नौकरी दिलाने के नाम पर उससे करीब 3 लाख रुपए लिए थे। शिकायतकर्ता ने पुलिस को एक कथित नियुक्ति/सिफारिश पत्र भी सौंपा था, जिसे केंद्रीय गृह सचिव की ओर से जारी बताकर जम्मू-कश्मीर के DGP को संबोधित किया गया था। इस पत्र में करीब 10-12 लोगों के नाम SPO के तौर पर नियुक्ति के लिए सुझाए गए थे। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद FIR दर्ज की गई और फिरदौस नबी को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के दौरान एडवोकेट जहांगीर अहमद डार की कथित भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उसे भी गिरफ्तार किया गया।
जांच आगे बढ़ने पर एक अन्य शिकायतकर्ता ने सरकारी सब्सिडी दिलाने के नाम पर करीब 6.5 लाख रुपए की ठगी किए जाने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने जम्मू के नानक नगर स्थित जहांगीर अहमद डार के किराए के मकान पर छापा मारा। वहां से कथित फर्जी सरकारी आदेश, मुहरें, 12 ATM कार्ड, जम्मू-कश्मीर बैंक के खाली लेटरहेड, कई पहचान पत्र, पासपोर्ट और वीजा से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। पुलिस को एक डायरी भी मिली, जिसमें कथित तौर पर पैसों के लेन-देन का विवरण दर्ज था। इसमें उन लोगों के नाम और रकम का जिक्र था, जिनसे कथित तौर पर पैसे लिए गए थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले लोगों से उनकी समस्याओं और सरकारी कामकाज में मदद के नाम पर संपर्क करते थे। एडवोकेट होने के कारण जहांगीर डार की सरकारी कार्यालयों और सिविल सचिवालय आने-जाने वाले लोगों से पहचान थी। इसी का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों का विश्वास जीतने के लिए किया जाता था। आरोपी शुरुआत में लोगों से कम रकम लेते और कई बार काम नहीं होने पर पैसे वापस भी कर देते थे। इससे लोगों का भरोसा बढ़ता था। इसके बाद नौकरी या सरकारी मंजूरी मिलने का दावा कर बड़ी रकम मांगी जाती थी।
आरोपी कथित तौर पर WhatsApp के 'View Once' फीचर के जरिए फर्जी सरकारी दस्तावेज लोगों को भेजते थे, ताकि दस्तावेज की कॉपी उनके पास न रहे। इन दस्तावेजों के जरिए पीड़ितों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी नौकरी या सरकारी लाभ की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
जांच के दौरान जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों से कई और शिकायतें पुलिस को मिली हैं। एक मामले में विदेशी यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलाने के नाम पर करीब 2.3 लाख रुपए, दूसरे मामले में दो सरकारी नौकरियां दिलाने के नाम पर करीब 15 लाख रुपए, जबकि एक अन्य शिकायत में एग्जीक्यूटिव स्तर की नौकरी और नर्सिंग की नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 27 लाख रुपए की कथित ठगी का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक पीड़ित केवल बडगाम तक सीमित नहीं हैं। पुलवामा से भी एक शिकायत सामने आई है और जम्मू-कश्मीर के अन्य इलाकों से भी शिकायतें मिल रही हैं। SSP ने कहा कि अभी तक की जांच में किसी सरकारी कार्यालय की फर्जी दस्तावेज तैयार करने में संलिप्तता सामने नहीं आई है।
पुलिस को जम्मू स्थित ठिकाने से एक कथित बार एसोसिएशन की मुहर भी मिली है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मुहर फर्जी है या आरोपी को उसे रखने और इस्तेमाल करने की अनुमति थी। पुलिस ने संबंधित बार एसोसिएशन से इसकी पुष्टि के लिए संपर्क किया है।
SSP ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी पूरे नेटवर्क का हिस्सा नहीं माने जा रहे हैं। पुलिस कथित सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान और तलाश में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
