कई Ration Card धारकों पर गिरी गाज... 43 हजार से अधिक के हटे नाम, 1 लाख से ज्यादा निशाने पर
Thursday, Jul 30, 2026-01:33 PM (IST)
जम्मू (सतीश) : जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चलाए जा रहे ‘राइटफुल टार्गेटिंग’ अभियान के दौरान बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थियों का खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार अब तक 43,183 अपात्र राशन कार्ड लाभार्थियों के नाम डेटाबेस से हटाए जा चुके हैं, जबकि 1,11,057 मामलों को अभी भी सत्यापन के लिए चिन्हित किया गया है। जम्मू-कश्मीर में अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए व्यापक स्तर पर डिजिटल सत्यापन अभियान चलाया गया। जांच के दौरान ऐसे लोगों के नाम सामने आए जो सरकारी मानकों के अनुसार राशन के पात्र नहीं थे, जिसके बाद उनके नाम सूची से हटा दिए गए। लद्दाख में भी इसी अभियान के तहत 3,529 मामलों को जांच के लिए चिन्हित किया गया, जबकि 677 अपात्र लाभार्थियों के नाम राशन कार्ड सूची से हटाए गए।
1 लाख से अधिक मामलों की जांच लंबित
आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में हटाए गए 43,183 लाभार्थी राष्ट्रीय स्तर पर हटाए गए कुल मामलों का लगभग 0.18 प्रतिशत हैं, जबकि लद्दाख के 677 मामले राष्ट्रीय कुल का करीब 0.003 प्रतिशत हैं। यह पूरी प्रक्रिया रियल-टाइम सत्यापन प्रणाली के माध्यम से संचालित की जा रही है। इस प्रणाली के जरिए राशन कार्ड लाभार्थियों का विवरण कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, आयकर विभाग, जी.एस.टी. नैटवर्क, सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली, वाहन पंजीकरण, कृषि मंत्रालय, ई.पी.एफ.ओ., गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, रेलवे तथा डाक विभाग सहित विभिन्न सरकारी डेटाबेस से मिलान किया जाता है।
हालांकि सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना और वास्तविक पात्र लोगों तक सरकारी खाद्यान्न का लाभ पहुंचाना है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में 43 हजार से अधिक अपात्र लाभार्थियों की पहचान और एक लाख से अधिक मामलों का अब भी जांच के दायरे में होना राशन वितरण व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही खामियों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रदेश को हर वर्ष मिलता है 4.69 लाख टन खाद्यान्न
जम्मू-कश्मीर को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक प्रत्येक वर्ष 4.69 लाख टन खाद्यान्न आवंटित किया गया। वहीं, लद्दाख को हर वर्ष 9,444 टन खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत खाद्यान्न के राज्य के भीतर परिवहन और उचित मूल्य की दुकानों (फेयर प्राइस शॉप) के डीलरों के मार्जिन के लिए केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को 2023-24 में 139.96 करोड़ रुपए, 2024-25 में 89.82 करोड़ रुपए और 2025-26 में 54.54 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की। लद्दाख को वर्ष 2023-24 में 1.38 करोड़ रुपए मिले, जबकि अगले दो वर्षों में कोई सहायता दर्ज नहीं की गई।
2025-26 में 0.82 मीट्रिक टन अनाज हुआ खराब
एक तरफ जहां जहां अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाए जा रहे हैं वहीं जम्मू कश्मीर में अनाज खराब होने का सिलसिला भी जारी है। सूत्रों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में 0.82 मीट्रिक टन (एम.टी.) खाद्यान्न खराब या वितरण के अयोग्य (नॉन-इश्यूएबल) घोषित किया गया। यह मात्रा 2024-25 में दर्ज 0.09 मीट्रिक टन की तुलना में लगभग नौ गुना अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में 261 मीट्रिक टन तथा 2022-23 में 248 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब हुआ था। हालांकि 2023-24 में कोई नुक्सान दर्ज नहीं किया गया, लेकिन उसके बाद फिर खराब अनाज के मामले सामने आने लगे हैं। भारतीय खाद्य निगम ( FCI) के गोदामों में रखा खाद्यान्न बाढ़, भारी बारिश, चक्रवात, परिवहन के दौरान नुकसान, गुणवत्ता संबंधी शिकायतों, तकनीकी दिक्कतों और आग जैसी घटनाओं के कारण वितरण योग्य नहीं रह जाता है।
खाद्यान्न के नुक्सान को रोकने और भंडारण व्यवस्था की निगरानी मजबूत करने के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने ‘डिपो दर्पण पोर्टल’ शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से गोदाम प्रबंधकों को बुनियादी ढांचे और संचालन संबंधी जानकारी जियो-टैगिंग के साथ अपलोड करनी होती है। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि 2023-24 में शून्य नुकसान के बाद 2025-26 में खाद्यान्न खराब होने की घटनाओं में दोबारा वृद्धि हुई है, जिससे सरकारी भंडारण व्यवस्था की प्रभावशीलता और निगरानी पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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