Jammu Kashmir पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, 68 ग्लेशियल झीलें खतरनाक कैटेगरी में शामिल

Tuesday, Sep 29, 2026-02:18 PM (IST)

जम्मू डेस्क : जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विधायक द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण विभाग ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश के 12 जिलों में गलेशियल झीलों की मैपिंग की गई है। इस मैपिंग के अनुसार 616 गलेशियल झीलों में से 68 झीलों को खतरनाक ग्लेशियल झीलों की कैटेगरी में डाला गया है। इन झीलों को नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा तय मानदंडों के अनुसार वर्गीकृत किया गया है।

ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी के चलते गलेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ऐसे में केंद्र शासित प्रदेश की कुछ ग्लेशियल झीलें खतरनाक कैटेगरी में पहुंच चुकी हैं। कुलगाम, गांदरबल, अनंतनाग, किश्तवाड़ जैसे जिलों में GLOF (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) का ख़तरा बढ़ गया है। इसके लिए सरकार द्वारा एक खास कमेटी भी बनाई गई है जो कि इन झीलों की लगातार स्टडी करेगी और आने वाले खतरे में सहायता करेगी। कमेटी ने जोखिम के आधार पर झीलों को A, B और C कैटेगरी में डाला है। इन कैटेगरी के हिसाब से ही झीलों पर नजर रखी जाएगी और आने वाली आपदा से पहले ही उसे रोकने की कोशिश की जाएगी या उसके द्वारा होने वाली तबाही को कम करने के लिए उपाय किए जाएंगे।

जानकारी के अनुसार उक्त कमेटी केंद्र शासित प्रदेश में स्वदेशी GIS-आधारित GLOF अर्ली वार्निंग सिस्टम डिजाइन करेगी और लागू करेगी। बता दें कि यह सिस्टम समय से पहले ही आने वाली तबाही की चेतावनी दे देगा जिससे खतरे से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायता मिलेगी। कमेटी इन झीलों पर सैटेलाइट के जरिए निगरानी रखेगी, इसके अलावा फील्ड में जाकर भी निगरानी रखी जाएगी ताकि खतरे को कम-से-कम किया जा सके।

बता दें कि 4 अप्रैल, 2024 को जम्मू-कश्मीर UT-स्तरीय फोकस्ड GLOF मॉनिटरिंग कमेटी (FGMC) का गठन किया गया था। यही कमेटी अब आने वाले खतरे से केंद्र शासित प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों को बचाने में सहायता करेगी। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश में ऑटोमैटिक मौसम स्टेशन, वॉटर-लेवल सेंसर और ज़िला-स्तर पर GLOF एक्शन प्लान लागू किए जा रहे हैं।

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Content Writer

Sunita sarangal

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