कौन थे बाबा जीतमल जी और बुआ कौड़ी जी? जानिए झिड़ी देवस्थान का पूरा इतिहास

Sunday, Nov 01, 2026-01:58 PM (IST)

जम्मू ( रोहित मिश्रा ) :  जम्मू-कश्मीर की धरती प्राचीन धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक गाथाओं और महान संतों की तपोभूमि के रूप में अपनी अलग पहचान रखती है। इसी पावन धरती पर जम्मू-अखनूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित झिड़ी में बाबा जीतमल जी और उनकी पुत्री बुआ कौड़ी जी का प्रसिद्ध देवस्थान श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस पवित्र स्थान पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर शीश नवाते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा जीवन में शांति की कामना करते हैं।

सदियों पुरानी है बाबा जीतमल जी की ऐतिहासिक गाथा

लोकमान्यताओं और डोगरा लोक परंपराओं के अनुसार, बाबा जीतमल जी को बाबा जित्तो के नाम से भी जाना जाता है। वे माता वैष्णो देवी के अनन्य भक्त और मेहनतकश किसान थे। उनकी पुत्री का नाम बुआ कौड़ी जी था। बाबा जीतमल जी का जीवन सच्चाई, ईमानदारी, मेहनत और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।

प्रचलित लोककथा के अनुसार, बाबा जीतमल जी ने एक जमींदार से खेती करने के लिए जमीन ली थी। उन्होंने दिन-रात मेहनत करके खेत में अच्छी फसल तैयार की। लेकिन जब फसल तैयार हुई तो जमींदार ने तय हिस्से से अधिक अनाज मांगना शुरू कर दिया। बाबा जीतमल जी ने इसे अन्याय मानते हुए उसके सामने झुकने से इनकार कर दिया।
कहा जाता है कि अन्याय और शोषण के विरुद्ध अपना विरोध प्रकट करते हुए उन्होंने पकी हुई फसल के ढेर पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। लोककथा के अनुसार, उनकी पुत्री बुआ कौड़ी जी ने भी अपने पिता की चिता पर प्राण त्याग दिए।

उनके इस सर्वोच्च बलिदान ने उन्हें लोकमानस में अमर कर दिया। आज भी उनकी गाथा डोगरा संस्कृति, लोकगीतों और पारंपरिक कथाओं के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है।

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बाबा दा तालाब भी है श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र

इस देवस्थान से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित बाबा दा तालाब भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व रखता है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पवित्र तालाब में स्नान करते हैं। मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक स्नान करने और पूजा-अर्चना करने से मन को शांति मिलती है तथा श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

जम्मू-कश्मीर ही नहीं, दूसरे राज्यों और विदेशों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

बाबा जीतमल जी और बुआ कौड़ी जी के प्रति लोगों की आस्था केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालु यहां माथा टेकने पहुंचते हैं। विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु भी अपनी आस्था और पारिवारिक परंपराओं के चलते इस पवित्र धाम में दर्शन करने आते हैं।

स्थानीय श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन, पवित्र भावना और पूर्ण श्रद्धा के साथ बाबा जी और बुआ कौड़ी जी के दरबार में अपनी अर्जी लगाता है, उसे उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। अनेक श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर दोबारा दरबार में हाजिरी लगाने और आभार व्यक्त करने पहुंचते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है ऐतिहासिक झिड़ी मेला

इस देवस्थान का सबसे बड़ा धार्मिक आकर्षण प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला ऐतिहासिक झिड़ी मेला है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु बाबा जीतमल जी और बुआ कौड़ी जी के दर्शन करने पहुंचते हैं। यह मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि डोगरा संस्कृति, परंपरा, भाईचारे और किसान समुदाय की ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक है।

बाबा जीतमल जी की गाथा आज भी समाज को यह संदेश देती है कि इंसान को अपनी मेहनत, ईमानदारी और अधिकारों के लिए हमेशा खड़ा रहना चाहिए। उनका जीवन अन्याय के सामने न झुकने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

झिड़ी स्थित यह पवित्र देवस्थान आज भी लाखों लोगों की श्रद्धा, विश्वास और आस्था का प्रतीक बना हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि एक ऐसी पवित्र भूमि है, जहां पहुंचकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और बाबा जीतमल जी तथा बुआ कौड़ी जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
जय बाबा जीतमल जी! जय बुआ कौड़ी जी!

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Content Editor

Neetu Bala

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