Operation Sindoor के हीरो बने SDM, Army Chief ने खुद किया सम्मानित

Saturday, Jul 11, 2026-11:20 AM (IST)

अखनूर(रोहित मिश्रा): भारतीय सेना के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) जनरल धीरज सेठ ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान बेहतरीन प्रशासन के लिए ब्रिगेड में SDM खौड़ सतीश शर्मा को मौके पर ही सम्मानित किया।

'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भूमिका और योगदान पर संक्षिप्त जानकारी

सतीश शर्मा, जो एक समर्पित, ईमानदार और बेहद पेशेवर सरकारी अधिकारी हैं और अभी खौड़ सब डिवीजन के सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के तौर पर कार्य कर रहे हैं, उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अहम भूमिका निभाई। उनकी सक्रिय लीडरशिप और बारीकी से की गई प्लानिंग की वजह से 8 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सीमावर्ती 53 गांवों से आम लोगों को सुरक्षित और समय पर बाहर निकालना प्रभावशाली कार्य किया।

उनकी देखरेख में जमीनी स्तर पर असरदार कार्रवाई के लिए विलेज एक्शन टीमें (VAT'S) बनाई गईं। जरूरी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया, ट्रांसपोर्ट का अच्छा इंतज़ाम किया गया और राहत शिविरों में खाने-पीने, साफ-सफाई और हेल्थकेयर की पूरी सुविधाएं दी गईं। अलग-अलग एजेंसियों के बीच रियल-टाइम तालमेल बनाए रखने के लिए 24x7 कंट्रोल रूम बनाया गया, जिससे किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

उनकी लगातार कोशिशों और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की वजह से, लगभग 86,000 में से 73,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और 17,000 लोगों को तय कैंपों में ठहराया गया। खौड़ सब डिवीजन में किसी की जान नहीं गई - जो संकट के समय में एक बहुत बड़ी कामयाबी थी।

सतीश शर्मा की खासियत उनका निजी कमिटमेंट और हिम्मत है। वे पूरे ऑपरेशन के दौरान जमीनी स्तर पर मौजूद रहे और गोलाबारी, रास्ते बंद होने और कम्युनिकेशन में रुकावट के बावजूद जोखिम वाले और संवेदनशील इलाकों का खुद दौरा किया। उन्होंने अपनी सुरक्षा या आराम की परवाह किए बिना चौबीसों घंटे काम किया और लगातार फील्ड टीमों, सेना के जवान और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के संपर्क में रहे। उन्होंने फ्रंटलाइन पर काम करने वालों की तरह ही जोखिम उठाए और यह पक्का करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की कि हर नागरिक को समय पर सुरक्षित जगह पहुंचाया जाए।

खास बात यह है कि SDM सतीश शर्मा की समय पर और सक्रिय कार्रवाई से कम से कम 80 लोगों की जान बची। ऑपरेशन के दौरान उनके घर पूरी तरह तबाह हो गए थे, लेकिन उनकी सीधी देखरेख और शुरुआती निर्देशों के तहत उन सभी को समय रहते सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया था। उनकी इस निर्णायक लीडरशिप की वजह से एक भी जान नहीं गई।

ऑपरेशन के दौरान ढांचे को नुकसान पहुंचा, जिसमें 11 घर पूरी तरह तबाह हो गए और 25 से ज्यादा घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। लोगों को सुरक्षित निकालने के बाद सतीश शर्मा ने सेना के जवानों के साथ मिलकर संपत्ति और मवेशियों को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए विस्तृत सर्वे किया। उन्होंने सरकारी मुआवजे के बंटवारे की खुद निगरानी की ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर मदद मिल सके।

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Content Writer

Sunita sarangal

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