लद्दाख में हाई कोर्ट बेंच बनाने का नियम लागू, न्याय व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती : L.G. Saxena

Saturday, Sep 05, 2026-08:53 PM (IST)

लेह/जम्मू  (उदय) :  केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की बेंच का लद्दाख में बैठना) नियम, 2026 जिसके तहत जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की एक बेंच केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में बैठेगी, शनिवार से लागू हो गया है। उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 5 सितम्बर 2026 को इस नियम के लागू होने की तारीख तय की है।

यह नियम भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा 27 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। नियम में खासतौर पर यह प्रावधान है कि यह उस तारीख से लागू होगा जिसे प्रशासक आधिकारिक गजट में अधिसूचना के माध्यम से तय करेंगे। इसी के अनुसार, उपराज्यपाल ने अब इसके लागू होने के लिए 5 सितम्बर 2026 की तारीख तय की है।

इस नियम का लागू होना लद्दाख में हाई कोर्ट बेंच के प्रावधान को चालू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है। इससे बेंच की स्थापना और उसे चालू करने की आगे की कार्रवाई आसान हो जाएगी, जिसमें जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के माननीय हाई कोर्ट और संबंधित विभागों के साथ जरूरी न्यायिक, प्रशासनिक, बुनियादी ढांचे, वित्तीय और लॉजिस्टिकल व्यवस्थाओं पर बातचीत शामिल है।

लद्दाख में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना से केंद्र शासित प्रदेश के लोगों, खासकर दूर-दराज के इलाकों के मुकद्दमों से जुड़े लोगों के लिए न्याय तक पहुंच में काफी सुधार होने की उम्मीद है। अभी, जिन लोगों को हाई कोर्ट में कार्यवाही की जरूरत होती है उन्हें लद्दाख से बाहर जाना पड़ सकता है, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता है। लद्दाख में बेंच के बैठने से उच्च न्यायिक सेवाएं लोगों के करीब आएंगी और लंबी दूरी की यात्रा और रहने-सहने से जुड़ी मुश्किलें कम होंगी।

L.G. Saxena ने कहा कि यह कदम लद्दाख जैसे भौगोलिक रूप से विशाल और चुनौतीपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहां कठिन इलाके, लंबी दूरी और खराब मौसम की स्थिति के कारण क्षेत्र के बाहर के संस्थानों तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की बेंच का गठन लोगों तक न्याय को और करीब लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। हमारे दूर दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए इससे न्याय तक पहुंच काफी बेहतर होगी और न्यायिक व्यवस्था नागरिकों के लिए और अधिक सुलभ हो जाएगी।

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Content Editor

Neetu Bala

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