J&K: CM उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के बीच हुआ Divorce, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

Friday, Jul 31, 2026-08:01 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर ( मीर आफताब ) :  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah और उनकी अलग रह रहीं पत्नी पायल अब्दुल्ला की शादी खत्म करने की मंज़ूरी दे दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की इस बात पर ध्यान दिया कि उन्होंने "आज़ादी अपना ली है"। शीर्ष अदालत ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता की ओर से पेश सीनियर Adv. Kapil Sibal की दलीलों पर ध्यान दिया। सिब्बल ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शादी खत्म करने के लिए एक अर्ज़ी दाखिल की गई है, क्योंकि दोनों पक्षों ने मामला सुलझा लिया है।

जस्टिस P.S. Narasimha और जस्टिस Alok Aradhe की बेंच ने कहा, "हम इसे अपने आदेश का हिस्सा बनाएंगे और उसी के आधार पर मामले का निपटारा करेंगे।"

 बेंच इस पर औपचारिक आदेश जारी करेगी।

सिब्बल ने बेंच से कहा, "दोनों ने आज़ादी अपना ली है। सब कुछ सुलझ गया है। अनुच्छेद 142 के तहत अर्ज़ी दाखिल की गई है। आप तलाक मंज़ूर कर सकते हैं।"

बेंच ने पूछा, "यह अर्ज़ी रिकॉर्ड पर कब आई?"

बताया गया कि अर्ज़ी 22 जुलाई को दाखिल की गई थी।

सिब्बल ने कहा, "बाकी सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे। अर्ज़ी में यह सब बताया गया है।"

बेंच दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें उमर अब्दुल्ला की वह याचिका भी शामिल थी जिसमें उन्होंने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी।

जुलाई 2024 में, शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली उमर अब्दुल्ला की याचिका पर पायल अब्दुल्ला से जवाब मांगा था।

12 दिसंबर 2023 को हाई कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि उनकी अपील में कोई दम नहीं है।

हाई कोर्ट ने 2016 के फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा था जिसमें उन्हें तलाक की डिक्री देने से इनकार कर दिया गया था।

30 अगस्त 2016 को फैमिली कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि वह "क्रूरता" या "छोड़ देने" (डेज़र्शन) के अपने दावों को साबित नहीं कर पाए, जो तलाक की डिक्री मांगने के लिए उनके द्वारा बताए गए आधार थे। तलाक की अपनी अर्ज़ी में, उमर अब्दुल्ला ने फ़ैमिली कोर्ट में कहा कि उनकी शादी पूरी तरह से टूट चुकी है और 2007 से उनके बीच पति-पत्नी जैसे संबंध नहीं रहे हैं। साथ ही, 1 सितंबर 1994 को शादी करने वाला यह जोड़ा 2009 से अलग-अलग रह रहा है।

ट्रायल कोर्ट में दायर अर्ज़ी में यह भी आरोप लगाया गया कि पायल का व्यवहार "अनुचित" था, जिससे इस नेता को तकलीफ़ और परेशानी हुई।

अगस्त 2023 में, दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने उमर अब्दुल्ला को अपनी अलग रह रही पत्नी को हर महीने 1.5 लाख रुपये का अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने का आदेश दिया।

उन्हें अपने दोनों बेटों में से हर एक की पढ़ाई के लिए भी हर महीने 60,000 रुपये देने का आदेश दिया गया।

हाई कोर्ट का यह आदेश पायल अब्दुल्ला और उनके बेटों की उन याचिकाओं पर आया था, जो उन्होंने निचली अदालत के 2018 के आदेशों के ख़िलाफ़ दायर की थीं। निचली अदालत ने पायल और उनके बेटों को उनके बालिग होने तक क्रमशः 75,000 रुपये और 25,000 रुपये का अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने का आदेश दिया था।

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Content Editor

Neetu Bala

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