BJP के ज़िला अध्यक्ष पर FIR दर्ज होने के बाद किया गया Suspend, लगे गम्भीर आरोप

Wednesday, Aug 12, 2026-09:06 PM (IST)

पुलवामा ( मीर आफताब ) :  पुलिस ने एक ठेकेदार की शिकायत पर BJP के पुलवामा जिला अध्यक्ष इंजीनियर सैयद शौकत गयूर अंद्राबी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता का आरोप है कि अंद्राबी पैसे की मांग कर रहे थे, अधिकृत काम में रुकावट डाल रहे थे और उन्हें व उनके कर्मचारियों को धमका रहे थे। एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला 10 अगस्त को पुलवामा पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 0145/2026 के तहत दर्ज किया गया। यह मामला बडगाम के सुथसू बीके पोरा के रहने वाले मोहम्मद यासीन गनी की लिखित शिकायत पर दर्ज किया गया है।

FIR के अनुसार, गनी गुरुद्वारा प्रबंधक, बरथाना से जुड़े काम के लिए मिट्टी निकालने और उसे ढोने का काम कर रहे हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह काम सक्षम अधिकारियों से जरूरी मंजूरी लेने के बाद शुरू किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गयूर ने बार-बार उनके काम में दखल दिया और बिना किसी रुकावट के काम जारी रखने देने के बदले उनसे 5 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि BJP नेता ने बार-बार उनसे संपर्क किया और उन्हें धमकाया। उन्होंने दावा किया कि पैसे की मांग के साथ-साथ उन्हें डराया-धमकाया गया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

शिकायत में 8 अगस्त की एक घटना का जिक्र है, जब गयूर कथित तौर पर सुबह करीब 10:50 बजे परिगाम में काम वाली जगह पर पहुँचे। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने अपनी निजी गाड़ी मिट्टी ढोने वाली गाड़ियों के सामने खड़ी कर दी, जिससे वे आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।

खबरों के मुताबिक, मज़दूरों और ड्राइवरों ने इस रुकावट पर सवाल उठाया और उन्हें बताया कि ठेकेदार के पास काम के लिए आधिकारिक मंज़ूरी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद गयूर ने मजदूरों के वीडियो बनाए और उन पर गैर-कानूनी गतिविधियां करने का आरोप लगाया।

FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने कुछ मजदूरों को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत कार्रवाई की धमकी दी। शिकायतकर्ता का दावा है कि PSA के तहत हिरासत में लेने की बात बार-बार कहकर मजदूरों में डर पैदा किया गया और उन पर पैसे की मांग पूरी करने के लिए दबाव डाला गया।

शिकायत में गयूर को पहले किए गए कथित भुगतानों का भी जिक्र है। इसमें दावा किया गया है कि 21 नवंबर, 2025 को 50,000 रुपये का भुगतान किया गया और उसके अगले दिन 4,000 रुपये का एक और भुगतान किया गया, जिससे कुल रकम 54,000 रुपये हो गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये भुगतान दबाव में किए गए थे, न कि अपनी मर्ज़ी से। उसने दावा किया कि इन भुगतानों के बावजूद, बाद में और पैसे की मांग की गई।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें गलत तरीके से रोकने, जबरन वसूली और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।

शिकायतकर्ता ने कथित वित्तीय लेन-देन की जांच और उन ड्राइवरों, कर्मचारियों व अन्य लोगों के बयान दर्ज करने की भी मांग की है जिन्होंने इन घटनाओं को देखा हो सकता है।

एक अधिकारी ने बताया कि जांच के तहत पुलिस मिट्टी निकालने और उसके परिवहन की मंज़ूरी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है, कथित भुगतानों के आरोपों की पुष्टि कर रही है और गवाहों के बयान दर्ज कर रही है।

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बीजेपी ने पुलवामा ज़िला अध्यक्ष गयूर अंद्राबी को जबरन वसूली की FIR के बाद किया सस्पेंड

 भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने अपने पुलवामा ज़िला अध्यक्ष, इंजीनियर सैयद शौकत गयूर को जबरन वसूली के आरोप में FIR दर्ज होने के बाद सभी आधिकारिक पदों से सस्पेंड कर दिया है। यह सस्पेंशन J&K बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा ने पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और अनुशासनात्मक समिति के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील सेठी की सिफारिश पर किया। सेठी ने तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी और कहा था कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संगठन को सख्त कदम उठाने की ज़रूरत है।

एक बयान में सेठी ने कहा कि बीजेपी हमेशा नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के उच्च मानकों पर कायम रही है और वह ऐसी किसी भी विवाद की इजाज़त नहीं दे सकती जिससे लोगों का पार्टी पर भरोसा कम हो।

सेठी ने कहा, "इंजीनियर सैयद शौकत गयूर पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। हालांकि कानून अपना काम करेगा और हर व्यक्ति को उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वह अपने संगठनात्मक मूल्यों और नैतिक मानकों को बनाए रखे। कोई भी पदाधिकारी जिस पर इतने गंभीर आरोप हों, वह तब तक संगठन में जिम्मेदारी वाला पद नहीं संभाल सकता जब तक कि पार्टी के अनुशासनात्मक तंत्र के जरिए मामले की जांच न हो जाए।"

उन्होंने कहा कि सस्पेंशन की सिफारिश सिर्फ पार्टी की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए की गई थी और इसे आपराधिक मामले के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं माना जाना चाहिए।

सेठी ने कहा, "सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। BJP का हमेशा से मानना ​​रहा है कि जन-प्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों को लोगों और संगठन के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौरान सस्पेंशन एक जरूरी संस्थागत कदम है ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके, लोगों का भरोसा बना रहे और पार्टी के उच्च नैतिक मानक कायम रहें।"

उन्होंने आगे कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई BJP के संविधान और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पदाधिकारी को अपना पक्ष रखने का उचित मौका मिले। सेठी ने कहा, "पार्टी जवाबदेही और प्राकृतिक न्याय, दोनों में विश्वास रखती है। जांच स्वतंत्र रूप से होगी और अनुशासनात्मक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, संगठन की गरिमा और अखंडता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।"

सेठी की सिफारिश के बाद, BJP अध्यक्ष सत शर्मा ने पुलवामा के जिला अध्यक्ष पद सहित सभी आधिकारिक पदों से गयूर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मंजूरी दे दी। यह निलंबन अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी होने तक लागू रहेगा। पार्टी ने कहा कि यह कार्रवाई संगठन में कड़ा अनुशासन बनाए रखने और ऐसी गतिविधियों के प्रति 'ज़ीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने) की नीति को दर्शाती है, जिनसे पार्टी की सार्वजनिक छवि पर बुरा असर पड़ सकता है।

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Content Editor

Neetu Bala

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