कच्छवा में फिर गूंजे श्रद्धा के स्वर, 36 वर्षों बाद प्राचीन गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना
Thursday, Apr 30, 2026-12:00 PM (IST)
बारामूला (रेजवान मीर): एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण में कश्मीरी पंडित समुदाय ने करीब 36 वर्षों के अंतराल के बाद कच्छवा स्थित प्राचीन गणेश मंदिर में वापसी की, जिससे क्षेत्र की साझा विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। बारामूला से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में वर्ष 1989 से पहले हर साल 29 और 30 अप्रैल को बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन होते थे, जिनमें विभिन्न समुदायों के लोग मिल-जुलकर पूजा-अर्चना करते और इस पवित्र स्थल पर एकत्रित होते थे।
इसी परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए, इस वर्ष श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति के साथ हवन का आयोजन किया। मंदिर परिसर एक बार फिर वैदिक मंत्रों की गूंज से गूंज उठा, जो एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। कल भी विशेष पूजा-अर्चना का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इस वापसी ने स्थानीय लोगों के बीच भावनाओं की लहर पैदा कर दी है। गांववासियों ने पंडित समुदाय का दिल से स्वागत किया और इसे गर्व तथा आशा का क्षण बताया। लोगों ने कहा कि यह पहल क्षेत्र में भाईचारे, आपसी सम्मान और शांति के पुराने दौर की यादें ताजा करती है। इस अवसर पर बारामूला के विधायक जावेद हसन बेग ने कच्छवा की ऐतिहासिक पहचान को प्रेम और भाईचारे का प्रतीक बताया।
उन्होंने उन दिनों को याद किया जब कश्मीरी पंडित शिक्षक और मुस्लिम छात्र आपस में गहरे रिश्तों से जुड़े होते थे और दोनों समुदाय एक-दूसरे के सुख-दुख में बराबर के भागीदार होते थे। यह आयोजन कश्मीर की सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सह-अस्तित्व की मजबूत परंपरा का सशक्त उदाहरण है, जो भविष्य के लिए एक नई उम्मीद और एकता का संदेश देता है।
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