Operation Sindoor के ''जांबाज'' सम्मानित: 98 सैन्य कर्मियों को ''Mention-in-Despatch''

Monday, Jan 26, 2026-07:20 PM (IST)

नई दिल्ली  (शिवम बक्शी) :  77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा घोषित किए गए शौर्य एवं सेवा पुरस्कारों की सूची में जहां कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र ने ध्यान खींचा, वहीं एक कम चर्चित लेकिन अत्यंत प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान — ‘मेंशन-इन-डिस्पैच’ (Mention-in-Despatch) — भी चर्चा का विषय बना।

इस वर्ष भारतीय सशस्त्र बलों के कुल 98 कर्मियों को मेंशन-इन-डिस्पैच से सम्मानित किया गया। इनमें ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले दो खुफिया अधिकारियों को विशेष रूप से यह सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान पाने वालों में कर्नल अमित कुमार यादव, 615 इंटेलिजेंस एंड फील्ड सिक्योरिटी यूनिट तथा कर्नल विनय कुमार पांडेय, 357 इंटेलिजेंस एंड फील्ड सिक्योरिटी यूनिट शामिल हैं। दोनों अधिकारियों के सटीक खुफिया इनपुट और पेशेवर कार्यशैली ने अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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मेंशन-इन-डिस्पैच सैन्य सम्मानों की प्रणाली में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह न तो पारंपरिक शौर्य पदक है और न ही केवल प्रशंसा पत्र, बल्कि एक ऐसा सम्मान है जो किसी अधिकारी या सैनिक की असाधारण सेवा को आधिकारिक सैन्य रिपोर्ट में दर्ज करता है।

सैन्य परंपरा में ‘डिस्पैच’ उस आधिकारिक रिपोर्ट को कहा जाता है, जिसे किसी ऑपरेशन के बाद कमांडिंग अधिकारी द्वारा उच्च अधिकारियों या सरकार को भेजा जाता है। जब इस रिपोर्ट में किसी सैनिक या अधिकारी का नाम कर्तव्य से बढ़कर किए गए उत्कृष्ट कार्य, असाधारण साहस या अनुकरणीय सेवा के लिए विशेष रूप से उल्लेखित किया जाता है, तो उसे मेंशन-इन-डिस्पैच माना जाता है।

हालांकि यह सम्मान अक्सर सार्वजनिक मंचों पर कम दिखाई देता है, लेकिन सशस्त्र बलों के भीतर इसे उच्च पेशेवर मान्यता के रूप में देखा जाता है। यह उन सैनिकों और अधिकारियों को दिया जाता है, जिनका योगदान रणनीतिक, खुफिया या संचालन स्तर पर निर्णायक साबित होता है।

मेंशन-इन-डिस्पैच से सम्मानित कर्मियों को संबंधित अभियान या सेवा पदक के रिबन पर कांस्य ओक लीफ (Bronze Oak Leaf) धारण करने का अधिकार होता है, जो उनके नाम के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होने का प्रतीक है।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह सम्मान उन गुमनाम नायकों की याद दिलाता है, जिनकी सेवाएं अक्सर पर्दे के पीछे रह जाती हैं, लेकिन देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए उनका योगदान अमूल्य होता है।

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Content Editor

Neetu Bala

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