Rajouri में सरकारी स्कूल बंद मिलने पर बवाल, जांच की उठी मांग
Tuesday, Oct 27, 2026-12:53 PM (IST)
राजौरी(अमित शर्मा): वरिष्ठ पी.डी.पी. नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद फारूक इंकलाबी ने जिला राजौरी के जोन कोटरंका के अंतर्गत आने वाले गवर्नमेंट गर्ल्स प्राइमरी स्कूल, त्रुन केवाल के कार्यदिवस पर सुबह करीब 10:45 बजे बंद पाए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
फारूक इंकलाबी ने कहा कि वह पिछले एक से दो वर्षों से जोन कोटरंका के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग से लगातार अपील करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधिकारिक कार्यसमय के दौरान किसी सरकारी स्कूल का बंद मिलना कर्मचारियों की उपस्थिति, विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की स्थिति के पीछे शिक्षकों के कथित अनियमित अटैचमेंट की भूमिका भी हो सकती है। उनके अनुसार, जोनल एजुकेशन ऑफिसर, कोटरंका द्वारा रैशनलाइजेशन के नाम पर कुछ शिक्षकों को उनके मूल तैनाती स्थलों से हटाकर उनके निवास स्थानों के नजदीक के स्कूलों में अटैच किए जाने की शिकायतें हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ऐसा नियमों के विपरीत हुआ है, तो इससे उन स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जहां उनकी अधिक आवश्यकता है।
इंकलाबी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी, राजौरी और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि गवर्नमेंट गर्ल्स प्राइमरी स्कूल, त्रुन केवाल के कार्यदिवस पर बंद पाए जाने के कारणों की तत्काल जांच कराई जाए। साथ ही, संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति, स्कूल के खुलने-बंद होने के रिकॉर्ड तथा ड्यूटी संबंधी आदेशों का सत्यापन किया जाए।
उन्होंने जोन कोटरंका के सभी सरकारी स्कूलों में औचक निरीक्षण कराने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों के रैशनलाइजेशन और अटैचमेंट से संबंधित आदेशों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करने की अपील की कि सभी नियुक्तियां और तैनातियां लागू नियमों के अनुरूप हों। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फारूक इंकलाबी ने कहा कि सरकारी स्कूल आम और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा की बुनियाद हैं। यदि स्कूल निर्धारित समय के दौरान बंद रहते हैं या जिन स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, वहां शिक्षक उपलब्ध नहीं होते, तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ता है। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक स्कूल सुचारू रूप से चले और शिक्षकों की तैनाती व्यक्तिगत सुविधा के बजाय विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले को केवल एक घटना तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए उच्च अधिकारियों को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए, ताकि जोन कोटरंका के सरकारी स्कूलों में बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
वहीं इस मामले में कोटरंका की ZEO खुर्शीद बेगम ने पंजाब केसरी से बात करते हुए बताया कि यहां पर पिछले कुछ दिनों से बच्चे भी आते हैं और टीचर भी आ रहे हैं। कोई एक आध टीचर कहीं व्यस्त था लेकिन उसकी जगह पर दूसरा टीचर लगा दिया गया है। वे कोशिश कर रहे हैं कि यहां पर बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दी जाए और उन्हें किसी प्रकार की भी कोई दिक्कत ना आए। मगर कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि कोई टीचर अटैचमेंट आर्डर ले आता है। उसके बाद उसे अटैच किया जाता है। उन्होंने बताया कि अभी फिलहाल अटैचमेंट भी बंद है मगर अगर कोई ऐसा मामला सामने आता है तो वह उसकी जगह तुरंत दूसरा टीचर लगा देते हैं ताकि बच्चों को पढ़ाई में कोई दिक्कत या परेशानी ना आए।
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