Kashmir में खुदाई के दौरान मिला 2,000 साल पुराना बौद्ध खजाना, सामने आया प्राचीन इतिहास

Saturday, Aug 29, 2026-06:38 PM (IST)

बारामूला(रिजवान मीर): उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के जहानपोरा में करीब 2,000 वर्ष पुरानी बौद्ध पुरातात्विक विरासत सामने आई है। यह स्थल व्यापक रूप से कुषाण काल (लगभग पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी) से जुड़ा माना जा रहा है। शनिवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने यहां जारी पुरातात्विक खुदाई का जायजा लिया और खुदाई के दूसरे चरण की शुरुआत की।

लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फैले इस स्थल पर लंबे समय से मौजूद मिट्टी के बड़े-बड़े टीले स्थानीय लोगों के लिए रहस्य बने हुए थे। वैज्ञानिक सर्वेक्षण और पुरातात्विक खुदाई के दौरान सामने आया कि ये टीले प्राकृतिक संरचनाएं नहीं, बल्कि एक विस्तृत प्राचीन बौद्ध परिसर के अवशेष हैं।

पुरातत्वविदों को यहां बौद्ध स्तूपों, प्राचीन संरचनाओं, दीवारों, मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों और तांबे की वस्तुओं समेत कई महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। प्रारंभिक संकेत इन अवशेषों को कुषाण काल से जोड़ते हैं। माना जा रहा है कि यह स्थल प्राचीन समय में कश्मीर को गांधार और मध्य एशिया से जोड़ने वाले व्यापक बौद्ध नेटवर्क का हिस्सा रहा होगा।

इस स्थल की पहचान में वर्ष 2023 में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली, जब पुरातत्वविद् डॉ. मोहम्मद अजमल शाह को फ्रांस के एक संग्रहालय के अभिलेखागार में संरक्षित एक पुरानी तस्वीर मिली। तस्वीर में बारामूला क्षेत्र के तीन स्तूप दिखाई दे रहे थे। इस ऐतिहासिक तस्वीर ने जहानपोरा के रहस्यमयी टीलों और प्राचीन बौद्ध अवशेषों के बीच संभावित संबंध स्थापित करने में शोधकर्ताओं की मदद की।

जहानपोरा में पहली प्रमुख खुदाई जम्मू-कश्मीर अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने कश्मीर विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ सेंट्रल एशियन स्टडीज के सहयोग से की। इस दौरान वैज्ञानिक सर्वेक्षण, ड्रोन इमेजरी, मैपिंग और व्यवस्थित पुरातात्विक खुदाई जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि जहानपोरा लगभग 2,000 वर्ष पुराना महत्वपूर्ण बौद्ध पुरातात्विक स्थल है और जारी खुदाई से कश्मीर की प्राचीन सभ्यता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि अवशेषों के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए कार्बन डेटिंग समेत आधुनिक वैज्ञानिक विधियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई वर्ष लग सकते हैं और भविष्य में यह स्थल एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित हो सकता है।

आज से शुरू हुए खुदाई के दूसरे चरण में स्थल के अन्य हिस्सों की जांच की जाएगी तथा प्राचीन संरचनाओं, बौद्ध गतिविधियों और उस समय के कश्मीर के व्यापक सांस्कृतिक एवं व्यापारिक संबंधों से जुड़े और प्रमाण मिलने की उम्मीद है।

जहानपोरा की यह खोज कश्मीर के प्राचीन इतिहास और बौद्ध विरासत को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे बारामूला का नाम क्षेत्र के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में शामिल होने के साथ-साथ यहां की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन को भी नई दिशा मिलने की संभावना है।

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Content Writer

Sunita sarangal

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